*खाद की कालाबाजारी रोकने हेतु प्रशासन ने दिए कड़े निर्देश
अनूप कुमार गुप्ता,
गढ़वा। धान की फसल में यूरिया खाद की बढ़ती मांग को देखते हुए जिले में इसकी कालाबाजारी और अनियमितता की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। किसानों का आरोप है कि कई थोक एवं खुदरा विक्रेता अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दर पर यूरिया बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, किसानों को यूरिया के साथ जबरन अन्य सामग्री जैसे एंजाइम या बाल्टी खरीदने के लिए भी बाध्य किया जा रहा है।
इस संबंध में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी दिनेश कुमार यादव ने जिले के सभी अंचल अधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि यूरिया खाद का अधिकतम खुदरा मूल्य ₹266 प्रति पैकेट निर्धारित है, लेकिन जिले के कई दुकानदार इससे अधिक दर वसूल रहे हैं, जो गंभीर मामला है और यह पूरी तरह से अनुचित है।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी थोक एवं खुदरा खाद दुकानों का औचक निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक विक्रेता अपनी दुकान के बाहर स्टॉक स्थिति और दर सूची अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। यदि कोई दुकानदार एमआरपी से अधिक कीमत पर यूरिया बेचते हुए पाया जाता है या अनुचित तरीके से बिक्री करता है, तो उसकी अनुज्ञप्ति रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू ने जानकारी दी कि जिले में लगभग 280 अनुज्ञप्तिधारी खाद-बीज विक्रेता हैं। इनमें से कई विक्रेताओं के खिलाफ किसानों द्वारा यूरिया की कालाबाजारी की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि खाद-बीज विक्रेता केवल अधिकृत थोक विक्रेताओं से ही खाद की खरीद करें और प्रति किसान सिर्फ एक पैकेट यूरिया खाद की बिक्री सुनिश्चित करें, ताकि सभी किसानों को खाद मिल सके और कोई कमी ना हो। उन्होंने अधिकारियों को लगातार निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश भी दिए, जिससे कालाबाजारी पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जा सके।
साथ ही, उपायुक्त ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं भी यूरिया खाद एमआरपी से अधिक दर पर बिकती है या जबरन अन्य सामग्री खरीदने के लिए कहा जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।