अनूप कुमार गुप्ता,
विशुनपुरा (गढ़वा)। प्रखंड प्रमुख दीपा कुमारी के नेतृत्व में विशुनपुरा प्रखंड क्षेत्र के सभी पंचायत जनप्रतिनिधि 12 अगस्त को बीडीओ की कथित मनमानी के खिलाफ काली पट्टी लगाकर प्रखंड सभागार में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। यह विरोध झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के उल्लंघन और पंचायत प्रतिनिधियों की अनदेखी के खिलाफ किया जा रहा है।
प्रमुख दीपा कुमारी ने बताया कि अधिनियम के अनुसार पंचायत कर्मियों पर नियंत्रण पंचायत समिति का अधिकार है, लेकिन बीडीओ द्वारा इस प्रावधान की अनदेखी कर मनमाने ढंग से पंचायत कर्मियों का तबादला किया जा रहा है। इससे विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। मनरेगा जेई रणधीर कुमार को कई महीने पहले प्रखंड में नियुक्त किया गया, लेकिन अब तक उन्हें किसी पंचायत की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। तीन पंचायतों में जेई नहीं होने से प्रधानमंत्री आवास और अबुआ आवास योजनाओं में लेबर डिमांड शून्य है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तबादले पैसों के बदले हो रहे हैं।
प्रमुख ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और उपविकास आयुक्त के निर्देशों के बावजूद बीडीओ मनरेगा कर्मियों के स्थान पर अन्य विभागों के कर्मियों से कार्य करवा रहे हैं। कर्मियों के अवकाश स्वीकृति में भी भेदभाव किया जा रहा है। बीडीओ के करीबी कर्मियों को आसानी से अतिरिक्त अवकाश मिल जाता है, जबकि अन्य कर्मचारियों को मामूली अवकाश के लिए भी महीनों इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि विभागीय बैठकों के प्रस्ताव समय पर संबंधित कार्यालयों को नहीं भेजे जाने से बाजार प्रबंधन, सड़क निर्माण, ऑटो/बस स्टैंड, सब्जी मंडी और विद्यालय मैदान अतिक्रमण की समस्याएं लंबित हैं।
जनप्रतिनिधियों की मांग है कि बीडीओ के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच हो, पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायत प्रतिनिधियों को मिले अधिकारों का सम्मान किया जाए, स्थानांतरण समिति की सहमति से हो और कर्मियों के अवकाश पर अंतिम निर्णय जनप्रतिनिधियों का हो।