लातेहार : लातेहार जिले के प्रसिद्ध श्री वैष्णव दुर्गा मंदिर का 31वां वार्षिकोत्सव 10 फरवरी को बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें 10,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
भंडारे का शुभारंभ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झा.मु.मो) के केन्द्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री बैद्यनाथ राम ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण करते हुए मंदिर के पुजारी त्रिभुवन पांडेय ने धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न कराया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़, भक्ति में लीन रहा माहौल
मंदिर प्रांगण में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मुख्य यजमान संतोष कुमार (पिंटू) अपने परिवार सहित पूजा-अर्चना में शामिल हुए और विधिपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इस मौके पर मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष श्री राम ने कहा कि यह मंदिर आस्था और विश्वास का प्रतीक है तथा इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
भंडारे के दौरान श्रद्धालु महिला और पुरुष अलग-अलग पंक्तियों में बैठकर भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण कर रहे थे। इस दौरान मंदिर समिति के सदस्यों ने पूरी निष्ठा और समर्पण भाव से सेवा कार्य में अपनी भूमिका निभाई।
मंदिर समिति की अहम भूमिका
तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन भंडारे के सफल आयोजन में मंदिर समिति के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंदिर समिति के संरक्षक महेंद्र प्रसाद गुप्ता, अभिनंदन प्रसाद, विनोद कुमार साहू, अर्जुन दास, अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता (भोला), उपाध्यक्ष कन्हाई प्रसाद अग्रवाल व बद्री प्रसाद, सचिव आशीष टैगोर, सह सचिव रंजीत कुमार व रविंद्र प्रजापति, कोषाध्यक्ष राजू रंजन सिंह सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंदिर समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को धन्यवाद देते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने श्रद्धालुओं को विश्वास दिलाया कि आने वाले वर्षों में भी मंदिर समिति इसी तरह श्रद्धा और समर्पण के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी।
आस्था और परंपरा का संगम बना आयोजन
श्री वैष्णव दुर्गा मंदिर का यह वार्षिकोत्सव आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम बना। श्रद्धालु इस आयोजन में पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ शामिल हुए। भक्तों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ते हैं।