(प्रशांत कुमार अंबष्ठ)
गोमिया प्रतिनिधि।
Central Coalfields Limited (सीसीएल) के कथारा क्षेत्र अंतर्गत स्वांग कोल वाशरी का अस्पताल, जो वर्ष 1985 में मजदूरों के लिए वरदान साबित हुआ था, आज बदहाली का शिकार होकर महज एक जर्जर ढांचा बनकर रह गया है। करीब 41 वर्षों बाद इस अस्पताल की स्थिति चिंताजनक हो गई है, जहां न पर्याप्त डॉक्टर हैं, न दवाइयां और न ही बुनियादी सुविधाएं।
स्थानीय वाशरी कर्मियों के अनुसार, एक समय यह अस्पताल पूरे क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी सुविधा था, लेकिन अब इसकी हालत बेहद खराब हो चुकी है। अस्पताल की सुरक्षा दीवार टूटी हुई है और कई बार शिकायत के बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई। भवन की छत जर्जर हो चुकी है, ढलाई में दरारें आ गई हैं और लोहे की छड़ें बाहर निकल आई हैं। डॉक्टर का चैंबर भी खस्ताहाल स्थिति में है, जबकि खिड़की-दरवाजे और फर्नीचर दीमक के कारण नष्ट हो चुके हैं।
अस्पताल में सुविधाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है। पूरे परिसर में मात्र चार कुर्सियां और दो टेबल ही बचे हैं। यहां न ड्रेसर है, न केमिस्ट, न कंपाउंडर, न नर्स और न ही एम्बुलेंस की व्यवस्था है। दवाइयों का भी पूरी तरह अभाव है, जिससे इलाज के लिए मजदूरों और उनके परिजनों को भटकना पड़ रहा है।
परियोजना पदाधिकारी बैकुंठ मोहन बाबू ने स्थिति को स्वीकारते हुए कहा कि डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर की नियुक्ति के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और डॉक्टर आने के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
वहीं अस्पताल कर्मी बलराम नायक ने बताया कि अस्पताल प्रतिदिन खुलता है और वर्तमान में विमला देवी, प्रभावती देवी सहित अन्य कर्मी नियमित रूप से ड्यूटी कर रहे हैं।
दूसरी ओर, स्वांग कोलियरी में पदस्थापित डॉक्टर अमर कुमार ने बताया कि उन्हें कथारा, गोविंदपुर और स्वांग तीनों क्षेत्रों का प्रभार दिया गया है, जिससे सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने भी माना कि पूरे कथारा क्षेत्र में चिकित्सकों की भारी कमी है।
इस बीच, स्वांग वाशरी के सभी ट्रेड यूनियन नेताओं ने एक स्वर में अस्पताल को सुचारू रूप से चालू करने, डॉक्टरों की बहाली तथा दवा एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हजारों मजदूर-कर्मी और उनके परिवार इलाज के अभाव में परेशान हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रबंधन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है, ताकि यह अस्पताल फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौटकर मजदूरों के लिए वरदान बन सके।