गढ़वा।1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान वीर अमर शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर के 168वें शहादत दिवस के अवसर पर उनके ऐतिहासिक गांव सन्या को डुबाने की कथित योजना के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया गया है। जन संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने इसे स्वतंत्रता सेनानियों और देश के गौरव का अपमान बताया है।
बताया गया कि ब्रिटिश शासन के दौरान जब देश में शोषण, अत्याचार, दमन और जमीन लूट चरम पर था, तब नीलाम्बर-पीताम्बर ने जनता को संगठित कर गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण दिया। लगभग 500 क्रांतिकारियों के साथ उन्होंने अंग्रेजों का साथ देने वाले रघुवर दयाल सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला, जिसमें कई अंग्रेज अफसर मारे गए।
रघुवर दयाल सिंह के सहयोग से 21 जनवरी 1858 को कमिश्नर डाल्टन मद्रास इन्फैंट्री, रामगढ़ घुड़सवार सेना और पिठोरिया परगनैत के सैनिकों के साथ रांची से पलामू पहुंचा। कई महीनों तक भीषण संघर्ष चलता रहा।
मुखबिरी के कारण 28 मार्च 1858 को ब्रिटिश सेना ने दोनों भाइयों सहित सैकड़ों आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में लेस्लीगंज ले जाकर 20 मार्च 1859 को पीपल के पेड़ पर दोनों भाइयों को निर्ममतापूर्वक फांसी दे दी गई। उनके साथियों को गोली मार दी गई और शवों को पास के एक कुएं में फेंक दिया गया।
आरोप है कि अंग्रेजों ने 1927 में कोयल नदी पर बांध बनाकर इस क्षेत्र के अस्तित्व को मिटाने की योजना बनाई थी, जिसे अब वर्तमान सरकार द्वारा पूरा किया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और वनाधिकार अधिनियम 2006 का खुला उल्लंघन है।
इसके अलावा हाथी कॉरिडोर के नाम पर बड़गढ़ से धुरकी तक सैकड़ों गांवों को उजाड़ने की योजना भी चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर के गांव को उजाड़ने के बजाय इसे आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत विनाश की योजना बनाई जा रही है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
जन अपील
सभी भाई-बहनों से अपील की गई है कि जल-जंगल-जमीन और शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर की धरती की रक्षा के लिए 10 जनवरी 2026 को गढ़वा जिला के बड़गढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत सन्या गांव में आयोजित शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में भारी संख्या में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करें।
शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर अमर रहें! अमर रहें!