संवाददाता | पाकुड़: Pakur district के Maheshpur प्रखंड की रहने वाली दुलाली मुर्मू ने अपने संघर्ष और मेहनत से आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक कहानी लिखी है। Phulo Jhano Aashirwad Abhiyan के तहत मिली सहायता ने उनके जीवन को नई दिशा दी।
सहायता मिलने के बाद दुलाली मुर्मू ने सुअर पालन और मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। शुरुआत में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करती रहीं। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनके इस कार्य से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
दुलाली मुर्मू की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही। उनकी लगन और उपलब्धि को देखकर आसपास की कई महिलाएं भी प्रेरित हुई हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
आज दुलाली मुर्मू अपने गांव की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसर मिलने पर कोई भी महिला अपनी अलग पहचान बना सकती है।