पंकज कुमार यादव |
बारेसांड के प्रभारी वनपाल परमजीत तिवारी के स्थानांतरण की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में असंतोष की लहर दौड़ गई। सूचना मिलते ही उनके बिट क्षेत्र के सैकड़ों महिलाएं और पुरुष सड़कों पर उतर आए और एकजुट होकर उनके समर्थन में आवाज बुलंद की।
ग्रामीणों का कहना है कि परमजीत तिवारी के कार्यकाल में जंगल और गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। उनके नेतृत्व में न केवल वनों की सुरक्षा मजबूत हुई, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हुए। इसके चलते अब ग्रामीणों को रोज़गार के लिए केरल, तमिलनाडु जैसे दूरस्थ राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ता।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने भावुक स्वर में कहा,
“तिवारी जी केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि हमारे परिवार के सदस्य की तरह हैं। वे हमारे सुख-दुख में दिन-रात साथ खड़े रहते हैं।”
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि उनका स्थानांतरण हुआ तो क्षेत्र के जंगल फिर से अवैध कटाई और वन्यजीवों के खतरे की चपेट में आ सकते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, परमजीत तिवारी सुबह से देर रात तक जंगल में भ्रमण करते रहते हैं। अपने घर-परिवार से दूर रहकर उन्होंने जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा। सीमित संसाधनों के बावजूद वे अकेले ही पूरे क्षेत्र की निगरानी कर वनों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि रेंजर अर्जुन बड़ाइक के बाद लंबे अंतराल पर तिवारी जी जैसे संवेदनशील, कर्मठ और जनसरोकार से जुड़े अधिकारी मिले हैं, जो सभी गांवों को साथ लेकर विश्वास के साथ कार्य करते हैं।
परमजीत तिवारी के समर्थन में मायापुर, बारेसांड, रामसेली, डांडकोचा, पहाड़कोचा, हुडूगढ़ा, सुग्गाबांध, गोयरा, बंधुआ, तीसिया, बरदारा, सेमरखांड, चेतमा सहित कई गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर सामने आए हैं।
ग्रामीणों ने वन प्रशासन से मांग की है कि परमजीत तिवारी को बारेसांड में यथावत रखा जाए, ताकि क्षेत्र में विकास, रोजगार सृजन और जंगलों की सुरक्षा का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके।