भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजन में उमड़ा गौरव और उत्साह।
नेतरहाट (लातेहार), 15 नवम्बर।
झारखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश का गौरव, शिक्षा का तीर्थ और तपोभूमि कहलाने वाला नेतरहाट आवासीय विद्यालय ने शनिवार को अपना 72वां स्थापना दिवस अत्यंत गरिमामय एवं उत्साहपूर्वक मनाया। 15 नवम्बर 1954 को स्थापित यह आवासीय विद्यालय गुरुकुल परंपरा पर आधारित देश के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। स्थापना दिवस के इस विशेष अवसर पर विद्यालय परिसर उत्सव के रंगों में रंगा दिखाई दिया।
स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि विद्यालय कार्यकारिणी समिति के सभापति श्री संतोष उराँव थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में नेतरहाट विद्यालय के पूर्व छात्र एवं समर्थगुरु श्री सिद्धार्थ ओलिया उपस्थित रहे। अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में 1980-87 बैच की ओर से मनोचिकित्सक डॉ. भास्कर प्रसाद और 1978 बैच के श्री सचिन्द्र कुमार झा, जो वर्तमान में अमेरिका में मैकेनिकल इंजीनियर हैं, उपस्थित रहे। इनके अलावा 1980-87 बैच से जुड़े अनेक पूर्व छात्र जिनमें प्रोफेसर, आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारी (CJM), प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शामिल थे, समारोह में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ की गई। इसके बाद छात्रों ने मुख्य अतिथियों को गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया तथा परेड निरीक्षण करवाया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा योगा, पीटी, सांस्कृतिक और कौशल आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिन्हें अतिथियों ने सराहा।
समारोह के दौरान विज्ञान एवं कृषि विषयों पर आधारित प्रदर्शनी का भी आयोजन हुआ, जिसका उद्घाटन अतिथियों ने किया।
प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा नवीन खोजों, ऐतिहासिक मॉडल, खेती-बाड़ी तकनीक और वैज्ञानिक प्रयोग प्रस्तुत किए गए।
प्राचार्य का संबोधन
प्राचार्य श्री संतोष कुमार ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं सह-पाठयक्रम उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यालय का गौरव इसकी अनुशासित शिक्षा, उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम और मूल्य आधारित शिक्षा व्यवस्था में निहित है।
उन्होंने विद्यालय को पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान करने और डिजिटल कक्षा समेत अन्य सुविधाओं के लिए झारखंड सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने छात्रों को निरंतर प्रयास और आत्मानुशासन के माध्यम से उत्कृष्ट भविष्य गढ़ने की प्रेरणा दी।
सभापति श्री संतोष उराँव का प्रेरणादायक वक्तव्य
कार्यकारिणी अध्यक्ष श्री संतोष उराँव ने कहा—
“नेतरहाट विद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक तपोस्थली है, जहाँ जीवन मूल्यों और उत्कृष्ट चरित्र का निर्माण होता है। यह स्थान साधारण छात्र को असाधारण व्यक्तित्व में बदलने की क्षमता रखता है।”
उन्होंने छात्रों से राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं का समुचित उपयोग करने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने विद्यालय के मुख्य भवन और कक्षावर्गों का जीर्णोद्धार कराया है, डिजिटल क्लासरूम व्यवस्था के तहत 06 IFP स्क्रीन उपलब्ध कराई हैं, साथ ही पहली बार विद्यालय में चिकित्सा पदाधिकारी की नियुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना ऐतिहासिक निर्णय है, जिसके लिए विद्यालय परिवार सरकार के प्रति कृतज्ञ है।
समर्थगुरु सिद्धार्थ ओलिया का आध्यात्मिक संबोधन
अपने भावुक संबोधन में समर्थगुरु सिदार्थ ओलिया ने कहा—
“मैं भी इसी पवित्र भूमि का विद्यार्थी रहा हूँ। आज इस विद्यालय में लौटकर मेरी आँखें नम हैं। यदि जीवन को सुंदर बनाना है तो प्रसन्नता, विनम्रता और अहंकार त्यागना सीखें। अपने भीतर के प्रकाश को पहचानें, तभी जीवन की सार्थकता सिद्ध होगी।”
कार्यक्रम में प्राचार्य, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, पूर्व छात्रगण, प्रशासनिक पदाधिकारी श्री रौशन कुमार बक्शी, शिक्षकगण एवं सभी कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
नेतरहाट आवासीय विद्यालय का यह 72वां स्थापना दिवस न केवल इतिहास की पुनरावृत्ति था, बल्कि भविष्य निर्माण की दिशा में भी एक सशक्त संदेश देकर समाप्त हुआ।