प्रेम कुमार साहू, घाघरा (गुमला)
गुमला जिले के घाघरा क्षेत्र के लिए रविवार का दिन बेहद दुखद रहा। 90 के दशक में सरकारी शिक्षक बने सुशील पासवान का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षा, फिटनेस और संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को लोग हमेशा याद करेंगे।
सुशील पासवान सिर्फ एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाले प्रेरणास्रोत भी थे। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों को शिक्षित करने और युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने में लगाया। वे नियमित मॉर्निंग वॉक, योग और फिटनेस को लेकर लोगों को प्रेरित करते थे। कई युवाओं ने उनके मार्गदर्शन में स्वस्थ जीवनशैली अपनाई, जो आज भी उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं।
संगीत के क्षेत्र में भी उनकी अलग पहचान थी। वे कैसियो वादन में बेहद निपुण थे और इलाके में उन्हें सबसे बेहतर कैसियो बजाने वाले कलाकार के रूप में जाना जाता था। उनके साथ घाघरा थाना में चौकीदार पद पर कार्यरत रामचंद्र बड़ाइक उर्फ दुती, समाजसेवी भूपेंद्र नाथ राम और योगेंद्र भगत मिलकर एक म्यूजिक ग्रुप चलाते थे। इस ग्रुप की पहचान पूरे इलाके में थी और हर सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति लोगों का मन मोह लेती थी।
सुशील पासवान के निधन के साथ ही इलाके में कैसियो की मधुर धुन जैसे हमेशा के लिए शांत हो गई। वे अपने पीछे शिक्षा, समाजसेवा और संगीत की अमिट छाप छोड़ गए हैं। क्षेत्र के लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
श्रद्धांजलि देने वालों में कुमार रवि, श्याम किशोर पाठक, शिवकुमार भगत उर्फ टुनटुन, अनिरुद्ध चौबे, अनिल उरांव, सुधीर कैंथवार, पवन शर्मा, विशुनदेव बड़ाइक, रवि पहान, कृष्ण लोहरा, अमित ठाकुर सहित कई गणमान्य लोगों के नाम शामिल हैं।