नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बजट 2026 में किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और गांवों को आर्थिक विकास का केंद्र बनाने के उद्देश्य से कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि केवल परंपरागत खेती से किसानों की आमदनी नहीं बढ़ेगी, बल्कि उच्च-मूल्य फसलों, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, तकनीक और मूल्यवर्धन की दिशा में बढ़ना होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा कि यह आवंटन विकसित, स्वावलंबी और रोजगारयुक्त गांवों के निर्माण को मजबूती देगा। वर्ष 2026-27 के लिए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1,62,671 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है, जबकि अकेले कृषि विभाग को 1,40,528.78 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसमें कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान पर 9,967 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे नई फसल किस्मों, बेहतर तकनीक और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र को पिछले वर्ष की तुलना में लगभग नौ हजार करोड़ रुपये कम मिले हैं, लेकिन सरकार का फोकस खेती की गुणवत्ता, उत्पादकता बढ़ाने, जोखिम घटाने और आय के नए स्रोत तैयार करने पर है। दूसरी ओर ग्रामीण विकास के लिए 2,73,108 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 21 प्रतिशत अधिक है।
खेती के विविधीकरण पर जोर
बजट का मुख्य संदेश यह है कि किसान केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहें। नारियल, काजू, कोको, चंदन, बादाम और अखरोट जैसी उच्च-मूल्य फसलों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग, मूल्यवर्धन और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सके।
नारियल के पुराने बागानों के पुनरुद्धार की योजना लाई जाएगी और तटीय क्षेत्रों में नारियल व काजू उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इससे किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई गई है।
पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी को बढ़ावा
संकेत साफ है कि कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी को भी आय के मजबूत स्रोत के रूप में विकसित किया जाएगा। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास की घोषणा की गई है। इससे मछली उत्पादन बढ़ेगा, ग्रामीण रोजगार सृजित होगा और महिला समूहों व मत्स्य उत्पादकों को बाजार से जोड़ा जाएगा।
खाद सब्सिडी से लागत में कमी
किसानों की लागत कम करने के लिए खाद एवं उर्वरकों पर 1,70,944 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रविधान किया गया है। सरकार का दावा है कि सस्ती खाद उपलब्ध होने से उत्पादन लागत घटेगी और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत जी-रामजी’ योजना
ग्रामीण रोजगार को मजबूती देने के लिए मनरेगा के स्थान पर ‘विकसित भारत जी-रामजी’ योजना शुरू की गई है। इस पर केंद्र सरकार ने 95,600 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। राज्यों के हिस्से को जोड़ने पर यह राशि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी। इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
पंचायतों को सीधी राशि
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायतों को 55,900 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे दी जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर सड़क, पानी, तालाब और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में तेजी आएगी।
लखपति दीदी और ‘शी-मार्ट’
लखपति दीदी योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए हर जिले में ‘शी-मार्ट’ स्थापित करने की घोषणा की गई है। यह सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल केंद्र होंगे, जहां स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार मिलेगा। इससे ग्रामीण महिलाएं आजीविका से आगे बढ़कर उद्यमी बन सकेंगी।
एआई टूल ‘भारत विस्तार’ से स्मार्ट खेती
खेती में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘भारत विस्तार’ नामक बहुभाषी एआई टूल लाया जा रहा है। यह एग्रीस्टैक पोर्टल और आईसीएआर की कृषि पद्धतियों से जुड़कर किसानों को फसल, मौसम और बाजार से संबंधित सटीक सलाह देगा। इससे किसानों की निर्णय क्षमता बेहतर होगी, जोखिम कम होगा और उत्पादकता बढ़ेगी।
सरकार का मानना है कि देश की लगभग 46.1 प्रतिशत श्रमशक्ति खेती पर निर्भर है। ऐसे में यह एआई टूल छोटे और सीमांत किसानों के लिए सटीक खेती की दिशा में बड़ी पहल साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर बजट 2026 में ‘काजू से तराजू’ तक की सोच दिखाई देती है—जहां उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, बाजार, तकनीक और ग्रामीण ढांचे को एक साथ मजबूत कर किसानों की आय बढ़ाने का व्यापक खाका पेश किया गया है। अब असली कसौटी इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की होगी।