बरहरवा।बसंत पंचमी का त्योहार हिन्दु धर्म के त्योहारों में एक हैं।इसे देश के अलग अलग राज्यों में अलग अलग नामों से जाना जाता हैं। बसंत पंचमी के दिन ज्ञान के देवी सरस्वती का पुजन किया जाता हैं।यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।इस दिन से होली का त्योहार आरंभ हो जाता हैं। सरस्वती पुजा विद्यार्थी, शिक्षक,पठन पाठन तथा गीत संगीत से जुड़े लोगों के लिए विशेष दिन होता है।इस समय अध्ययन अध्यापन और नये कार्यों के आरंभ के शुभ संकेत होता है ।
यह त्योहार ऋतु के राजा बसंतराज यानि बसंत ऋतू का आरंभ होता है खेत फसल से लहलहाते है इस दिन गेहूं तथा जौ की बलिया को भगवन को अर्पित की जाती है भगवन को अबीर गुलाल चढ़ाया जाता है. ज्ञान प्राप्ति और सुस्ती,आलस और अज्ञानता के छुटकारा पाने के लिए बसंत पंचमी को मां सरस्वती को विशेषतौर पर पूजन किया जाता है . बरहरवा नगर पंचायत क्षेत्र के कहारपाड़ा ग्राम में संचालित एस.एस.क्लासेज बरहरवा में सरस्वती पूजा कार्यक्रम धुम धाम से सम्पन्न किया गया।इस मौके पर कोचिंग संस्थान में पुजा स्थल को काफ़ी आकर्षक ढंग से सजाया गया। सरस्वती मां की प्रतिमा स्थापित कर पुजा अर्चना की गयी।सभी लोगों को प्रसाद वितरण किया गया।इस मौके पर कोचिंग के संचालक सोनू सिंह ने कहा कि मॉ सरस्वती को शिक्षा,कला व विज्ञान की देवी कहा जाता है।मां की पुजा मानसिक रुप से मजबूत व दृढ़ संकल्पित बनाती है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती पृथ्वी पर प्रकट हुई थीं। माता सरस्वती ने पृथ्वी पर उदासी को खत्म कर सभी जीव जंतुओं को वाणी दीं थी। इसलिए माता सरस्वती को ज्ञान विज्ञान संगीत,कला और बुद्धि की देवी की देवी भी माना जाता है। पुजा कार्यक्रम को सफल बनाने में कोचिंग के विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।