गोमिया:- समाज तेजी से आधुनिक हो रहा है—तकनीक हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन इसी तकनीकी विकास ने अपराध की दुनिया को भी नया रूप दे दिया है। अब अपराधी सीधे चोरी, ठगी, लूट जैसी घटनाओं को अंजाम नहीं देते, बल्कि वर्चुअल दुनिया के माध्यम से आम लोगों को निशाना बनाते हैं। इस नए प्रकार के अपराध को हम साइबर क्राइम कहते हैं। साइबर अपराधियों के तीन प्रमुख हथियार होते हैं— डर, लालच और लापरवाही। इन्हीं तीनों का इस्तेमाल कर वे लोगों के मेहनत की कमाई को मिनटों में साफ कर देते हैं।
हाल के दिनों में गोमिया थाना क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो बताती है कि कैसे साइबर अपराधी मासूम युवाओं को बहला—फुसलाकर अपने जाल में फंसा रहे हैं और उन्हें अपराध की राह पर धकेल रहे हैं।
घटना होसिर गांव की है, जहां 16–17 वर्ष का एक किशोर साइबर अपराधियों के झांसे में आ गया। अपराधी ने बच्चे को फोन कर उसके बैंक अकाउंट को “किराए पर देने” का लालच दिया और इसके बदले हर महीने निश्चित राशि देने का वादा किया। उस समय किशोर का कोई बैंक खाता नहीं था, लेकिन पैसों के लालच ने उसे गलत राह की ओर धकेल दिया। वह बैंक गया, नया खाता खुलवाया और खाते से जुड़ी सारी निजी जानकारी, जैसे—एटीएम नंबर, पासवर्ड, ओटीपी आदि, साइबर अपराधी को दे दी।
साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट (Mule Account)” कहा जाता है, जिनका उपयोग अपराधी काले धन को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए करते हैं, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे। किशोर को यह नहीं पता था कि वह अनजाने में अपराधियों की मदद कर रहा है। कुछ ही दिनों में उसके फोन पर पूरे दिन ट्रांजेक्शन की संदेश आने लगे। 2–3 महीने तक उसे “किराया” भी मिला, जिससे उसे लगा कि सब कुछ सही चल रहा है।
लेकिन अचानक पैसा आना बंद हो गया। घबराए किशोर ने मामला गोमिया थाना में बताया। थाना प्रभारी ने तुरंत उसका बैंक खाता बंद करवाया और उसे समझाया कि ऐसा करना कानूनन अपराध है। साथ ही परिजनों को बुलाकर कड़ी चेतावनी दी गई ताकि भविष्य में बच्चा या उसका परिवार किसी धोखे में न आए।
यह घटना केवल एक उदाहरण है। अभी भी कई लोग साइबर अपराधियों के लालच में फंसकर अपने बैंक अकाउंट को किराए पर दे रहे हैं। ऐसा कर वे अनजाने में न सिर्फ खुद खतरे में पड़ते हैं, बल्कि साइबर अपराधियों को भी अपराध करने में सहयोग करते हैं। यदि किसी म्यूल अकाउंट का उपयोग किसी बड़े वित्तीय धोखाधड़ी, आतंकवादी फंडिंग या अन्य आपराधिक गतिविधि में होता है, तो कानूनी कार्रवाई सीधे उस अकाउंट धारक पर होती है।
साइबर अपराधी अपने शिकार की तलाश में रहते हैं—खासतौर पर ऐसे लोग जो पैसा कमाने के आसान और गलत रास्ते ढूंढते हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।
क्या करें?
- कभी भी अपने बैंक अकाउंट, एटीएम, पासवर्ड, ओटीपी किसी से साझा न करें।
- आसान पैसे का लालच देने वाली किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें।
- बच्चों और किशोरों को साइबर अपराधों के बारे में जानकारी दें।
- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
समय रहते जागरूक न हुए तो हमारी मेहनत की कमाई किसी साइबर अपराधी के हाथों चंद मिनटों में गायब हो सकती है। इसलिए सतर्क रहें और अपने आसपास के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दें।