संवाददाता अनूप कुमार गुप्ता
विशुनपुरा (गढ़वा):- गरीबी और रोजगार की तलाश में घर छोड़कर बाहर जाने की मजबूरी ने एक बार फिर एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी है। प्रखंड क्षेत्र के अमहर पंचफेड़ी टोला निवासी 24 वर्षीय दिलीप बियार, पिता बसंत बियार मजदूरी के लिए भोपाल गया था।
बताया जा रहा है कि घर लौटते समय ट्रेन से गिरकर उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि यदि सरकार भवनाथपुर में बंद पड़े एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े क्रेशर प्लांट को पुनः चालू करा देती, तो क्षेत्र के हजारों युवाओं को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ता।
ग्रामीणों का तर्क है कि यह प्लांट वर्षों से बंद पड़ा है और इसके पुनरुद्धार की मांग लंबे समय से की जा रही है। उनका कहना है कि यदि यह परियोजना शुरू होती, तो दिलीप जैसे कई युवा अपने गांव में ही काम कर सकते थे और इस तरह की दर्दनाक घटना से बचाव संभव था।इधर, भोपाल रेलवे विभाग द्वारा कानूनी प्रक्रियाओं के बाद पोस्टमार्टम कराया गया और शव को गांव भेजा गया। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। दिलीप के माता-पिता अपने इकलौते सहारे को खोने के गम में बेहाल हैं। गांव में भी शोक का माहौल गहरा गया है।
घटना की जानकारी मिलने पर झामुमो विशुनपुरा प्रखंड इकाई के प्रखंड अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, मानिक सिंह, भार्दुल चंद्रवंशी, संजय गुप्ता, संजय चंद्रवंशी, बालकृष्णा सिंह और श्यामसुंदर चंद्रवंशी ने मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया।ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि भवनाथपुर की बंद पड़ी परियोजनाओं को तत्काल चालू कराया जाए, मृतक परिवार को उचित मुआवजा एवं आर्थिक सहायता दी जाए तथा क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जाए ताकि युवाओं का पलायन रुक सके।दिलीप की मौत ने एक बार फिर यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि कब तक रोजगार की कमी गरीब परिवारों से उनकी जान की कीमत वसूलती रहेगी।