बेसहारा और आवारा कुत्तों की समस्या : एक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती

बेसहारा और आवारा कुत्तों की समस्या : एक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती

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बेसहारा और आवारा कुत्तों की समस्या : एक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती

भारत के कई शहरों और कस्बों में बेसहारा व आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बन गई है। सड़कों पर इन कुत्तों की मौजूदगी से न केवल यातायात और आवाजाही प्रभावित होती है, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगता है। कई बार आक्रामक होकर ये कुत्ते लोगों पर हमला भी कर देते हैं।

समस्या के मुख्य कारण

  • जनसंख्या वृद्धि: कुत्तों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी, लेकिन भोजन और ठिकाने की कमी।
  • आक्रामकता: भूख, बीमारी (जैसे रेबीज) या दुर्व्यवहार के कारण कुत्ते हिंसक हो सकते हैं।
  • बीमारियों का खतरा: रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का प्रसार, जो मनुष्यों के लिए गंभीर खतरा है।

कानूनी और प्रशासनिक पहल

भारत सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और एबीसी (पशु जन्म नियंत्रण) नियम, 2023 बनाए हैं। ये नियम पकड़ो–नसबंदी–टीकाकरण–छोड़ो (CNVR) मॉडल पर आधारित हैं, जिसे विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने भी मान्यता दी है।

प्रशासन की भूमिका

  • नगरीय निकायों द्वारा एबीसी यूनिट स्थापित करना।
  • कम से कम 70% बेसहारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण।
  • पशु कल्याण संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम चलाना।
  • केंद्र सरकार प्रति कुत्ता ₹800 और प्रति बिल्ली ₹600 तक की सहायता देती है।
  • आश्रय स्थलों और पशु चिकित्सालयों के लिए करोड़ों रुपये का अनुदान उपलब्ध है।

पशु चिकित्सक और पशु कल्याण समितियों की भूमिका

  • नसबंदी और टीकाकरण को सुरक्षित रूप से लागू करना।
  • सुरक्षात्मक उपकरणों का प्रयोग करना।
  • रेबीज से बचाव हेतु प्री-एक्सपोज़र वैक्सीन लगवाना।

जनता की भूमिका

  • कुत्तों को निर्धारित स्थानों पर ही भोजन कराना।
  • आक्रामक कुत्तों से छेड़छाड़ न करना।
  • संभव हो तो आवारा कुत्तों को गोद लेना।
  • स्थानीय पशु कल्याण संगठनों का सहयोग करना।

रेबीज से बचाव

  • कुत्तों का टीकाकरण: बेसहारा कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण अनिवार्य है।
  • मनुष्यों का टीकाकरण:
    • उच्च जोखिम वाले लोगों (पशु चिकित्सक आदि) को 3 खुराक दी जाती है।
    • काटने पर पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस के तहत 4–5 खुराकें दी जाती हैं।
  • काटने पर प्राथमिक उपचार:
    • घाव को 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोना।
    • तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और टीकाकरण कराना।

संवैधानिक और कानूनी आधार

  • 73वां संशोधन: पंचायतों की जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं का प्रबंधन।
  • 74वां संशोधन: नगर निगमों की जिम्मेदारी शहरी क्षेत्रों में आवारा मवेशियों और कुत्तों का प्रबंधन।
  • अन्य कानून: कैटल ट्रेसपास एक्ट, नगर निगम अधिनियम, खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 आदि।

समाधान के लिए जरूरी कदम

  1. एबीसी कार्यक्रम का सशक्त क्रियान्वयन।
  2. राज्य स्तर पर निगरानी समिति और फंड की उपलब्धता।
  3. आश्रय स्थल व गौशालाओं का विकास।
  4. जन-जागरूकता अभियान।
  5. निगरानी और रिपोर्टिंग की पारदर्शी व्यवस्था।

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