स्लग : हाथियों का तांडव
प्रशांत कुमार सिन्हा, गोमिया (बोकारो)
एंकर
बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाथियों के हमले से पिछले आठ दिनों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। वहीं हाथियों से बचाव के लिए संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस पहल नहीं किए जाने पर लोगों में गहरा आक्रोश है.
गोमिया प्रखंड के कुंदा पंचायत स्थित खखण्डा गांव में देर रात जंगली हाथी के हमले में एक और महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान सांझो देवी (उम्र लगभग 60 वर्ष) के रूप में हुई है।
रविवार की रात करीब 11 बजे झुंड से भटका एक जंगली हाथी गांव में घुस गया और घरों के दरवाजे व दीवारों पर धक्के मारने लगा। इसी दौरान सांझो देवी, जो घर पर अकेली थीं, आवाज सुनकर खतरे से अनजान बाहर निकलीं। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, हाथी ने उन्हें सूंढ़ में पकड़कर घसीट लिया और कुछ दूरी पर पटककर मार डाला।
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण आक्रोशित हो गए और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ललपनिया–रामगढ़ हीरक सड़क पर शव रखकर जाम कर दिया। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का आतंक इतना बढ़ गया है कि लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पिछले आठ दिनों में तीन लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन विभाग और प्रशासन हाथियों से निपटने और बचाव को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बना पा रहा है।
आपको बता दें कि इससे पहले सोमवार को तिलैया गांव में जंगली हाथियों ने दो युवकों — प्रकाश महतो और चरकु महतो — की जान ले ली थी। उस समय भी संबंधित अधिकारियों द्वारा सुरक्षा उपाय नहीं किए जाने पर ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की थी।
ग्रामीणों का सवाल है—आखिर प्रशासन कब जागेगा? कब तक उन्हें इस तरह असहाय होकर हाथियों के हमलों का सामना करना पड़ेगा?
समाचार लिखे जाने तक सड़क जाम जारी था।