कोटालपोखर। संवाददाता।
कोटालपोखर में अवैध कोयले का कारोबार इन दिनों खुली चुनौती बन चुका है। साहिबगंज जिला के कोटालपोखर थाना क्षेत्र अंतर्गत मयूरकोला, श्रीकुंड और आसपास के विभिन्न मार्गों से पूरी रात भुटभुटी और जुगाड़ गाड़ियों के जरिए कोयले की ढुलाई की जा रही है। यह मामला अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार सीमावर्ती इलाके के बरहरवा प्रखंड से सटे कोटालपोखर थाना क्षेत्र के सीमा क्षेत्र के गांवों के आसपास के जंगल इन दिनों तस्करों के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं। सूत्रों का दावा है कि जंगलों के भीतर कोयले के बड़े-बड़े ढेर जमा किए जा रहे हैं। रात होते ही भुटभुटी और जुगाड़ गाड़ियों की गड़गड़ाहट से इलाका गूंज उठता है और अवैध कोयला एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है।
बताया जा रहा है कि यह कोयला सिरासिन, फतेहपुर और दुधीजोल स्थित ईंट भट्ठों में खपाया जा रहा है। अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय पुलिस-प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि तस्कर बेखौफ होकर काम कर रहे हैं और कथित तौर पर ‘सेटिंग’ का दावा कर कार्रवाई से बचने की बात कहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल अवैध कमाई का खेल नहीं, बल्कि जंगल और पर्यावरण पर सीधा हमला है।
इस संबंध में कोटालपोखर थाना प्रभारी ने कहा कि ग्रामीण जलावन के लिए कोयला ले जा रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि कोयला केवल जलावन के लिए ले जाया जा रहा है, तो फिर रात के अंधेरे में भुटभुटी और ट्रकों से ढुलाई क्यों की जाती है? दिन के समय यह परिवहन क्यों नहीं होता?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस काले कारोबार पर नकेल कसेगा या कोयला माफियाओं को यूं ही खुली छूट मिलती रहेगी?