हुसैनाबाद/पलामू :- सामाजिक कुरीति निवारण योजना, राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, बाल विवाह मुक्त झारखण्ड एवं मिशन शक्ति योजना से संबंधित अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन प्रखंड परिसर हुसैनाबाद में किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री संजय सिंह यादव, जिला परिषद उपाध्यक्ष श्री आलोक कुमार, प्रखंड प्रमुख राजकुमारी देवी, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, पलामू, बीडीओ हुसैनाबाद, बीडीओ मोहम्मदगंज, बीडीओ हैदरनगर, अंचल पदाधिकारी, सहायक निदेशक, रांची कृष्णा टोप्पो द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अतिथियों का स्वागत महिला पर्यवेक्षिकाओं एवं जेंडर सीआरपी द्वारा पौधा भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, पलामू नीता चौहान ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह उन्मूलन हेतु केंद्र सरकार द्वारा 100 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह के लिए बालिकाओं की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं बालकों की 21 वर्ष निर्धारित है, इससे कम उम्र में विवाह कराना कानूनन अपराध है।इनके द्वारा बताया गया कि वर्ष 2024 में 12 एवं 2025 में कुल 17 बाल विवाह को रोका गया है। किसी भी संदिग्ध स्थिति में टोल फ्री चाईल्ड हेल्पलाइन 1098 , महिला हेल्पलाइन 181, पुलिस हेल्पलाइन 112 पर देने की अपील की गई।मिशन शक्ति के अंतर्गत बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, शक्ति सदन, पालना आदि योजनाओं का संचालित किया जा रहा है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सखी वन स्टॉप सेंटर का संचालन सभी जिलों में किया जा रहा है, इसके अंतर्गत हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सेवाओं—चिकित्सीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुलिस सहायता, विधिक परामर्श एवं अल्पावधि आश्रय—की जानकारी दी। इसके साथ ही महिला हेल्पलाइन 181 के द्वारा 24 घंटे आपातकालीन सेवा प्रदान की जाती है।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सावित्रीबाई किशोरी समृद्धि योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामूहिक विवाह कार्यक्रम, सामूहिक अंतिम संस्कार योजना एवं दिव्यांग कल्याणार्थ योजनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री संजय सिंह यादव ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा जैसी कुरीति को दूर करने का एकमात्र उपाय शिक्षा है। डायन जैसी ज्यादातर केस असहाय, दलित, पिछड़ा, विधवा परिवार में ही पाया जाता है। इस तरह के अंधविश्वास से दूर रहने एवं सामाजिक चेतना को जगाने का आग्रह किया गया।
ईसाई धर्म गुरु के द्वारा बताया गया कि अंधविश्वास को प्रोत्साहित नहीं करें, शिक्षा पर जोर दे। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाए एवं लोगों को जागरूक करें।
हिंदू धर्मगुरु मिथलेश पाठक द्वारा लोगों को जागरूक करने का आग्रह किया गया, एवं बाल विवाह को अभिशाप बताया।
मौलवी वकील अहमद ने शिक्षा को सबसे बड़ी दौलत बताया। जिनके पास शिक्षा नहीं है वो जानवर जैसा जीवन गुजारता है।
बी डी ओ मोहम्मदगंज ने बताया कि डायन का आरोप विधवा, असहाय महिलाओं पर किसी विवाद की वजह से लगाया जाता है। डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि किसी महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करने पर तीन माह तक का कारावास, एक हजार रुपये जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। इसके अलावा नशा को रोकने के लिए अधिनियम, कन्या भ्रूण हत्या पर भी चर्चा किया गया।
रिसोर्स पर्सन, यूनिसेफ के द्वारा बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, डायन प्रथा, बाल विवाह निषेध पदाधिकारी के बारे में विस्तृत जानकारी पी पी टी के माध्यम से दिया गया।
बी डी ओ, हैदरनगर शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि हम अगर एक महिला को शिक्षित करते हैं तो साथ पीढ़ी को सुरक्षित करते हैं। सावित्री बाई फूले स्कीम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बालिकाओं को शिक्षा प्राप्त करने, ड्रॉप आउट की दर को कम करने एवं बाल विवाह को रोकथाम के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा किशोरियों को कक्षा 8 से कक्षा 12 तक किशोरियों को एकमुश्त 40000 रु की राशि प्रदान की जाती है। हैदरनगर प्रखंड में 2500 लड़कियां इस योजना का लाभ ले रही हैं।
अंचल अधिकारी, हैदरनगर ने कन्यादान योजना के बारे में बताया कि इसके अंतर्गत आर्थिक सहायता के रूप में 30000 रु की राशि प्रदान की जाती है। इसके लिए एक साल के अंदर शादी का निबंधन कर आवेदन करना होगा।
बी डी ओ, हुसैनाबाद ने कहा कि बाल विवाह एक संज्ञेय एवं गैर जमानती अपराध है। इसके लिए दोषियों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना एवं दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
कृष्णा टोप्पो, सहायक निदेशक, रांची द्वारा कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्वेश्य राज्य द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मातृत्व एवं योजना के बारे में बताते हुए कहा कि प्रथम बार गर्भवती एवं प्रसूति महिला को दो बार किस्तों में 5000 की राशि दी जाती है एवं द्वितीय संतान बेटी हो तो एकमुश्त 6000 की राशि दिए जाने का प्रावधान है।
अनुमंडल पदाधिकारी, हुसैनाबाद के द्वारा लड़कियों के शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आज कल प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं। हमारा सहयोग हमेशा रहेगा। समाज में बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा जैसी कुरीतियों को दूर करने शिक्षा अंतिम उपचार है।
श्री आलोक कुमार ,उपाध्यक्ष, जिला परिषद, पलामू के द्वारा बाल विवाह, डायन कुप्रथा जैसी कुरीति का मुख्य कारण शिक्षा के अभाव को बताया। इन कुरीतियों को दूर करने में सभी विभागों एवं अधिकारियों के बीच समन्वय की जरूरत पर जोर दिए।
मासूम आर्ट केंद्र के द्वारा डायन कुप्रथा पर नाटक कर इसके कानूनी प्रावधान एवं दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक किया गया।
कार्यशला के अंत में एक्शन प्लान पर भी चर्चा किया गया एवं मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री संजय सिंह यादव की उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह मुक्त झारखण्ड की शपथ दिलाई गई एवं तीन महीनों के अंदर पलामू जिला को बाल विवाह मुक्त घोषित करने का निर्णय लिया गया।
मंच संचालन शालिनी श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, मुखियागण, जिला परियोजना सहायक निरंजन कुमार गुप्ता (आभा) , यूनिसेफ के रिसोर्स पर्सन सुमन कुमारी, सहायक निदेशक कृष्णा टोप्पो, सभी महिला पर्यवेक्षिकाएं, पंचायत सचिव, जेएसएलपीएस बी पी एम, संबंधित कर्मी उपस्थित थे।