पलामू:- जिले में कार्यरत चतुर्थवर्गीय 251 अनुसेवक, जिन्होंने आठ वर्ष से अधिक समय तक सेवा दी, उन्हें झारखंड सरकार की ओर से जारी एक नोटिस के आधार पर अचानक नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इस निर्णय से आक्रोशित अनुसेवकों ने कई बार पलामू समाहरणालय परिसर के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर अपनी पीड़ा प्रशासन के सामने रखी।
बर्खास्त अनुसेवकों ने पलामू उपायुक्त से मिलकर सवाल उठाया कि जब नियुक्ति सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर हुई थी, तो नियमावली में हुई त्रुटि का खामियाजा कर्मचारियों को क्यों भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विज्ञापन या नियमावली में कोई गलती थी, तो उसके लिए वे कैसे दोषी ठहराए जा सकते हैं।
धरना-प्रदर्शन के बावजूद जब उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो अंततः 251 बर्खास्त अनुसेवक न्याय की गुहार लगाने के लिए पलामू से रांची तक पदयात्रा पर निकल पड़े। अनुसेवकों की प्रमुख मांग है कि सरकार उन्हें समायोजित कर पुनः नौकरी प्रदान करे।
अनुसेवकों का कहना है कि सरकार ने स्वयं विज्ञापन निकाला, नियुक्ति दी और वर्षों तक उनसे सेवा ली, ऐसे में अचानक नौकरी से बाहर करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने राज्य सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की है।