गढ़वा: पारंपरिक श्रद्धा और उत्सव के साथ हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन

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गढ़वा: पारंपरिक श्रद्धा और उत्सव के साथ हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन

संवाददाता अनूप कुमार गुप्ता

गढ़वा:- दुर्गा पूजा के समापन पर गढ़वा जिला मुख्यालय में भक्ति, परंपरा और श्रद्धा का अद्वितीय संगम देखने को मिला। ऐतिहासिक गढ़देवी मंदिर परिसर से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन यात्रा का शुभारंभ हुआ।

परंपरा के अनुसार, श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाया और जयकारों के बीच सोनपुरवा स्थित रामबांध तालाब तक ले गए।पूरे मार्ग में ‘जय माता दी’ के नारों और ढोल-नगाड़ों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु मां के अंतिम दर्शन करने और प्रतिमा को कंधा देने को लेकर इतने उत्साहित थे कि कई बार आपसी होड़ जैसी स्थिति बन गई। लाल चुनरी ओढ़े श्रद्धालुओं ने मां को भावभीनी विदाई दी।नम आंखों से दी गई मां को विदाई पूजा-अर्चना और विशेष आरती के उपरांत श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां को विदा किया। वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने और उसमें भाग लेने के लिए शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।

विसर्जन स्थल रामबांध तालाब पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और चारों ओर सिर्फ भक्ति और श्रद्धा की भावना दिखाई दी।

जिले भर के पंडालों की प्रतिमाओं का भी हुआ विसर्जन

गढ़वा: पारंपरिक श्रद्धा और उत्सव के साथ हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन

गढ़देवी मंदिर के अलावा जिले भर के कई पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का भी गुरुवार को विधिवत विसर्जन किया गया। प्रमुख पंडालों में जय माता दी संघ सोनपुरवा, जय भारत संघ टंडवा, जय भवानी संघ संगत मोहल्ला, पुरानी बाजार, जय मां शेरावाली संघ भगलपुर, मां वैष्णव संघ टंडवा टांडी, जय मां पूजा समिति नवादा मोड़, नाहर चौक, और चिनिया रोड के नाम शामिल हैं।

सुरक्षा व्यवस्था रही सुदृढ़

इस भव्य आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। जुलूस मार्ग पर थाना प्रभारी, पुलिस बल और अन्य अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था संभालते दिखे। मुख्य चौक-चौराहों पर जवानों की तैनाती रही। प्रशासन की तत्परता से जिले भर में शांति, सौहार्द और व्यवस्था बनी रही।

25 वर्षों से जारी है ‘जय मां शेरावाली भंडारा’

गढ़वा: पारंपरिक श्रद्धा और उत्सव के साथ हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन

गढ़देवी मंदिर परिसर में चल रहा ‘जय मां शेरावाली भंडारा‘ इस वर्ष 25वें वर्ष में प्रवेश कर गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार उर्फ नागर ने बताया कि सप्तमी से दशमी तक प्रतिदिन विशाल भंडारे का आयोजन होता है। यह परंपरा स्थानीय लोगों के सहयोग और श्रद्धा से अब एक सामाजिक उत्सव का रूप ले चुकी है। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में आकर प्रसाद ग्रहण किया।भंडारा और प्रसाद वितरण बना आकर्षण का केंद्र*गढ़वा शहर के नवादा मोड़, विशुनपुर पंडाल, टंडवा देवी धाम, अन्नपूर्णा मंदिर, और मां शेरावाली भंडारा सहित कई पंडालों में भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। कहीं खीर, कहीं दही-पूड़ी, तो कहीं बुंदिया-पूड़ी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

महिलाओं, युवाओं और बच्चों की विशेष भागीदारी इस आयोजन में देखने को मिली।दूध की किल्लत, बाजार में बढ़ी मांग,भंडारे में खीर की अधिकता के कारण ,दूध की मांग अचानक बढ़ गई, जिससे बाजार में सुधा, मेधा, आशीर्वाद जैसे नामी ब्रांड का दूध नदारद हो गया। कई किराना दुकानों पर दूध के लिए लोगों को भटकते देखा गया। हालांकि, स्थानीय विक्रेताओं ने सीमित आपूर्ति से जैसे-तैसे स्थिति संभाली।

आस्था, परंपरा और सामाजिक उत्सव भी है दुर्गा पूजा*गढ़वा की दुर्गा पूजा यह प्रमाणित करती है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का सजीव उदाहरण है।

मां गढ़देवी की विदाई ने जहां हर आंख को नम किया, वहीं समाज को शांति, सौहार्द और एकता का गहरा संदेश भी दिया।

विदाई के साथ नए आरंभ की प्रेरणा

मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन केवल विदाई नहीं, बल्कि नव आरंभ का प्रतीक है। यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि हर अंत के साथ एक नई शुरुआत हमारा इंतजार कर रही होती है। गढ़वा की जनता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि संगठित समाज हर पर्व को भव्यता, मर्यादा और श्रद्धा के साथ मना सकता है।

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