उधवा:- तीनपहाड़ में दुर्गा पूजा के दशमी के मौके पर आदिवासीओ ने निकाला “हूर बोल” अखाड़ा।जानकारी के अनुसार आज़ादी के पहले से ही आदिवासियों के द्वारा (पत्ते झाड़ी आदि पहन) अलग अलग भेष भूसा बनाकर दुर्गापूजा के दशमी के दिन गिरते पड़ते व नाचते “हूर बोल” बोलते व सिटी बजाते बाज़ार भर्मण करते हुए दुर्गामंदिर पहुचते है।कुछ साल पहले तक यह परंपरा पूरे जिले भर में प्रचलित थी लेकिन मौजूदा दौर में यह सिर्फ कुछ जगहों पर ही कायम हैं।
तीनपहाड़ में यह आदिवासी अपने परंपरा के अनुसार भेष भूषा बनाकर आते हैं जिन्हें देखने के लिए लोग काफी उत्साहित होते हैं और यह लोगो के बीच आकर्षण का केंद्र होता है।आदिवासियों का “हूर बोल” अखाड़ा बीते गुरुवार की संध्या अपने अलग अलग करीब दो दर्जन टोली बनाकर लोगो का मनोरंजन करते हुए मंदिर पहुचा।वही सबसे अच्छे पाट करने वाली टोली को दुर्गापूजा कमिटि के द्वारा पुरष्कृत किया गया।