दुमका:- अनादि काल से ही भारत में दान की विशेष महत्ता रही है तथा इसके कई अलग-अलग स्वरूप भी बताए गए हैंl लेकिन वर्तमान समय में यदि कोई दान सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण है तो वह है ‘रक्तदान’l रक्तदान को यूं ही महादान नहीं कहा जाता है क्योंकि इससे कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैl वर्तमान समय में जहां लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए अनायास ही चक्कर काट रहे हैं ऐसे में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपने जीवन को पूरी तरह समाज के प्रति समर्पित कर चुके हैंl बताते चलें की उपराजधानी दुमका में जामा प्रखंड अंतर्गत भैरवपुर गाँव की रहने वाली रीता देवी अस्पताल में भर्ती थी। उनके बच्चेदानी का ऑपरेशन होना था। चुंकि मरीज के शरीर में खून की मात्रा काफी कम थी अतः चिकित्सकों नें उन्हें एक यूनिट ओ पॉजिटिव रक्त चढ़ाने की सलाह दी थी,मरीज तथा उनके परिजनों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए वह रक्त की व्यवस्था कर पाने में असमर्थ थे, अंततः उन्होंने निर्मल कुमार साह से मदद की गुहार लगाईl मदद की गुहार सुनते ही श्री साह ने वत्स सेवा समिति के अध्यक्ष रक्तवीर चंचल सिंह से संपर्क कियाl चंचल सिंह ने तुरंत इसाफ बैंक के कर्मचारी निशा जी से रक्तदान का अनुरोध कियाl चुकी निशा जी नें कुछ दिन पूर्व ही रक्तदान किया था तो वह तत्काल रक्तदान नहीं कर सकती थी अतः उन्होंने दुमका स्थित राधा माधव मंदिर के सामने रहने वाले गिलानपाड़ा निवासी अमित कुमार घोष से रक्तदान हेतु संपर्क किया।संपर्क के तुरंत बाद ही अमित कुमार घोष अपने सभी जरूरी कार्यों को छोड़कर ब्लड बैंक पहुंचे तथा एक यूनिट ओ पॉजिटिव रक्त दान किया, तथा महिला की जान बचाई। रक्तदान के बाद अमित कुमार घोष ने आम लोगों से भी रक्तदान की अपील की।उन्होंने कहा कि 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है।रक्तदान करने से शरीर में किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।सरकार भी समय-समय पर रक्तदान के लिए आम लोगों को जागरूक करती रहती है,अतः हमें समाज की भलाई के लिए रक्तदान अवश्य करना चाहिए ताकि गरीब तथा जरूरतमंद लोगों की ससमय मदद की जा सके। हमें अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती है जिसमें रक्त की कमी से किसी मरीज की जान चली गई हो या उन्हें समय पर रक्त उपलब्ध न हो पा रहा हो, ऐसे में उन तमाम रक्त वीरों को सलाम तथा साधुवाद जो वास्तव में मानवता की भलाई के प्रतीक हैंl