- सरना कोड
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प्रकृति पूजक सरना समुदाय का अस्तित्व खतरे में-फुलचंद
बसंत कुमार गुप्ता व्यूरो प्रमुख गुमला।
गुमला:- सोमवार को केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय कार्यालय 13 आर आई टी बिल्डिंग कचहरी परिसर रांची में आकस्मिक बैठक रखा गया बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने किया एवं उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में प्राकृतिक पूजक आदिवासियों को अपना अस्तित्व बचाना मुश्किल हो रहा है एक तरफ सरना कोड की लड़ाई दूसरी ओर कुर्मी आदिवासी का मुखौटा लगाकर आदिवासी घर में घुसना चाह रहे हैं इधर भाजपा आर एस एस के लोग आदिवासी को हिंदू बनने में लगे हुए हैं और इधर आदिवासी हडिया दारु चकना खा पीकर मस्त है और आपस में लड़ झगड़ का समाज को कमजोर कर दिए हैं जिसके कारण धर्मांतरित हिंदू आदिवासी नेता एवं धर्मांतरित ईसाई आदिवासी नेता मूल आदिवासियों को किलो के भाव में बेच रहे हैं एवं इधर-उधर नचा रहे हैं इसी का फायदा कुर्मी महतो भी उठाना चाह रहे हैं वे लोग समझ चुके हैं कि आदिवासी मृत प्राय हो चुके हैं इसीलिए केंद्र सरकार में दबाव बनाकर आदिवासी बनना चाह रहे हैं यदि समय रहते आदिवासी नहीं जागे तो इसका परिणाम बड़ी भयंकर होगा आदिवासियों का विनाश तय है उन्होंने कहा कि 9 फरवरी को मोरहाबादी मैदान से बिरसा चौक तक की पदयात्रा में शामिल करने के लिए गांव मौजा के अखाड़े में नगाड़ा बजाकर जगाने का अभियान चलाया जाएगा और यह अभियान 8 फरवरी तक चलेगा मौके पर केंद्रीय सरना समिति के महासचिव संजय तिर्की अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष सत्यनारायण लकड़ा महिला शाखा अध्यक्ष नीरा टोप्पो झारखंड सरना मसना विकास समिति के नगिया टोप्पो मीरा की राई बना मुंडा कंदना उरांव ललित कच्छप विनय उरांव एवं अन्य शामिल थे