रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को आदिवासी युवाओं को नक्सली बताकर फर्जी सरेंडर कराए जाने से जुड़े गंभीर मामले पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 20 नवंबर 2025 तय की है।
यह जनहित याचिका झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की ओर से दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि राज्य के 514 युवाओं को झूठा नक्सली घोषित कर जबरन सरेंडर कराया गया, ताकि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपनी उपलब्धियां दिखा सकें और केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष पुरस्कार प्राप्त कर सकें।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि युवाओं को सीआरपीएफ में नौकरी देने का लालच दिया गया और इसके लिए राज्य सरकार के खजाने से करोड़ों रुपए खर्च किए गए। पूर्व की सुनवाई में अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के गृह सचिव को सरेंडर से जुड़े सभी दस्तावेजों की सीलबंद रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या इन युवाओं को रांची के पुराने जेल परिसर में प्रशिक्षण दिया गया था और यदि हां, तो क्या वह प्रशिक्षण कानूनी रूप से वैध था?
इस कथित फर्जी सरेंडर कांड में दिग्दर्शन कोचिंग इंस्टीट्यूट का नाम भी सामने आया था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 514 में से केवल 10 युवाओं के नक्सली गतिविधियों से संबंध पाए गए। जांच टीम ने 128 युवाओं के बयान दर्ज किए, जिनमें से अधिकांश अपने पते पर नहीं मिले या सत्यापन में असफल रहे।
फिर भी, जांच पूरी किए बिना मामले को बंद कर दिया गया, जिससे अब इस पूरे प्रकरण की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
📌 अगली सुनवाई: 20 नवंबर 2025
📌 मुख्य मुद्दा: 514 युवाओं का कथित फर्जी सरेंडर मामला
📌 याचिकाकर्ता: झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स