- लापरवाही के कारण ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा खतरे में : इफ्तेखार महमूद
तेनुघाट।
हाथियों के आतंक के मामलों को लेकर सक्रिय झारखंड आंदोलनकारी एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव इफ्तेखार महमूद ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए वन विभाग एवं बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि 6 फरवरी को ग्राम केरी में वन विभाग का दस्ता मौजूद रहने तथा बिजली की उपलब्धता के कारण जंगली हाथी कोई बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे सके और जंगल की ओर लौटने को मजबूर हो गए। वहीं बड़की पुन्नू, गंगापुर, दरगाहबेड़ा, कंडेर, तिलैया समेत अन्य क्षेत्रों में जहां-जहां जंगली हाथियों ने जान-माल का नुकसान किया, वहां घटना के समय न तो बिजली थी और न ही वन विभाग का कोई दस्ता मौजूद था।
श्री महमूद ने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध रहती और वन विभाग सतर्क रहता, तो हाथियों के आतंक से काफी हद तक बचाव संभव था।
उन्होंने आरोप लगाया कि बोकारो वन प्रमंडल पदाधिकारी एवं संबंधित रेंजरों की भारी लापरवाही के कारण ग्रामीणों की जान-माल की रक्षा नहीं हो पा रही है। गोमिया प्रक्षेत्र में करीब दो वर्षों तक रेंजर रहे श्री ए.एन. तिवारी ने अपने कार्यकाल में एक बार भी हाथी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा नहीं किया। वहीं वर्तमान रेंजर सुरेश राम तथा डीएफओ नीतीश कुमार के कार्यकाल में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
इफ्तेखार महमूद ने कहा कि यदि वन विभाग के अधिकारी हाथी प्रभावित इलाकों का नियमित भ्रमण करें और अधीनस्थ कर्मियों को सक्रिय रखें, तो जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली नागरिक सुविधाओं से ग्रामीण क्षेत्र वंचित हैं। डीएमएफटी फंड से शहरी क्षेत्रों में हाई मास्क लाइटें लगाई जा रही हैं, जबकि इसकी सबसे अधिक आवश्यकता हाथी प्रभावित ग्रामीण इलाकों में है। इसके साथ ही बिजली विभाग की लापरवाही के कारण रात-रात भर बिजली गुल रहती है, जिसका सीधा फायदा जंगली हाथी उठाते हैं।
अंत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव इफ्तेखार महमूद ने कहा कि जब तक सरकार ग्रामीणों की उपेक्षा की नीति नहीं छोड़ती, तब तक ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती।