कुमार प्रशांत की रिपोर्ट,
लक्ष्य की ओर
परिवेश और चुनौतियाँ – हर किसी की जीवन यात्रा संघर्षमय होती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता और धैर्य से बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह प्रक्रिया में केवल कठिनाइयों का सामना करती है, बल्कि यह आत्म – विकास की ओर भी ले जाती है। जब वे संघर्षों का सामना करते हैं, तो वह अपने अद्भुत कई अनुभवों को भी महसूस करते हैं और इन्हीं अनुभवों से प्रेरित होकर हम अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं।
मोनिका देवी की कहानी
मोनिका देवी अपने तीन बेटी और एक बेटा के साथ हजारी पंचायत के पटवा टोला में रहती थी। उनके जीवन में सिर्फ ईंधन से रगड़ा गया था। न कोई राह, न कोई मंजिल, नारे तरफ अंधेरा ही अंधेरा। कठिनाइयों का सामना करते – करते थक चुकी थी। उनके सामने परिवार की दैनिक खर्चा जुटा पाना भी कठिन हो रहा था और इस कठिनाई में उनकी तीनों बेटियों की शादी, उनकी पढ़ाई लिखाई की नित्सा से दिन दुखी रहती थी। उनके लगातार प्रयास के बाद भी पैसे के तंगी से कोई न कोई स्थिति सुधार न होती थी। ऐसे में वह अपने आस – पास के लोगों – निर्माण और बिक्री के काम देखकर, वह इस व्यवसाय से जुड़ी, और इससे होने वाले आमदनी से अपने घर खर्चा चलने लगी। अब उनके जीवन पथन का एकमात्र सहारा यही था। इस व्यवसाय से वह दिन प्रतिदिन महबूस होती गई। इस व्यापार से लेना उनके अपने परिवार के लिए ठीक नहीं था क्योंकि लोगों के बीच हड़िया – दारू बेचना अपने आप में समाज से अलग – थलग होने का एहसास करा रही थी, फिर भी कोई अन्य विकल्प के कारण से कुछ नया कर पाने में असंगार था।
संघर्ष और सफलता
मोनिका देवी बताती हैं कि साल 2023 में स्मिता कुमारी और ज्योति देवी के समझाने से SHG से जुड़ी और जुड़ने के बाद “पगली जानो आशीर्वाद अभियान” के अंतर्गत व्याज मुक्त ऋण Rs. 10,000/- लेकर अपने घर के पास एक छोटी सी दुकान शुरू की। शाम नायक के सहयोग से boil oil और चाय बेचने का दुकान दिया गया और वह करते जा रही है। अपने बारे में बताते हुए मोनिका देवी कहती है कि हड़िया – दारू बेचना छोड़कर इस सम्मानजनक कार्य से जुड़कर वह बहुत खुश है और अच्छा महसूस कर रही है।
प्रेरणा और सीख
मोनिका देवी ने अनेक विकट परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानी। अब भी उनके जीवन में संघर्ष कम नहीं है, लेकिन हिम्मत और हौसला पहले से ज्यादा है। अब उनका बेटा भी कुछ – कुछ काम करने लगा है और बचे समय में अपनी माँ के काम मदद करता है। मोनिका देवी कहती है कि JSLPS और “पगली जानो आशीर्वाद अभियान” के आर्थिक सहयोग से वह सफल हो पाई है। मोनिका ने अब दोबारा से एक सामान का – साथ आने वाले नाश्ता और दिन में श्रृंगार दुकान चलाए। जिससे उनके आमदनी में कुछ और बढ़ोतरी हो और घरेलू जरूरतो की पूर्ति अच्छी तरह से हो सके।
मुसीबतें और रहेंगी, फिर भी हिम्मत न हारी
अब यही सोचती है। हमारा भी वक्त आएगा..