बड़ासोनाकड़–मेहंदीपुर–अशीला होकर ट्रैक्टर सीधे बंगाल रवाना, प्रशासन मौन
बरहरवा (साहेबगंज)।
साहेबगंज जिला के बरहरवा प्रखंड अंतर्गत कोटालपोखर थाना क्षेत्र के बड़ासोनाकड़, मेहंदीपुर और बड़ी अशीला क्षेत्र इन दिनों बालू कारोबार का ऐसा केंद्र बन चुके हैं, मानो यह इलाका किसी अंतरराज्यीय सीमा चौकी में तब्दील हो गया हो। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बालू भरकर खुलेआम पश्चिम बंगाल की ओर रवाना किया जा रहा है।
दिन हो या रात, धूप हो या बारिश—बालू लदे ट्रैक्टरों का यह काफिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ट्रैक्टरों की रफ्तार इतनी तेज है कि सड़क पर गिरा बालू देखकर राहगीरों को समझ ही नहीं आता कि वे सड़क पर चल रहे हैं या किसी नदी घाट पर।
सड़क बनी रेत का मैदान
स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही से सड़क पर इतना बालू बिखर चुका है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। वाहन चालकों के लिए फिसलन और आम लोगों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का व्यंग्य भरा सवाल है कि ट्रैक्टरों की गिनती करना अब बेकार हो गया है—क्योंकि गिनते-गिनते मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाती है, लेकिन बालू ढोने वाले ट्रैक्टर खत्म नहीं होते।
खुलेआम चल रहा कारोबार, निगरानी नदारद
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा बालू कारोबार इतनी खुलेआम और बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा है कि लोगों को लगने लगा है मानो कोई
“बालू भेजो—बंगाल बचाओ” योजना चुपचाप चल रही हो।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की चुप्पी ने बालू माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना रोक-टोक कैसे अंतरराज्यीय सीमा पार कर रही हैं?
जनता पूछ रही है सवाल
अब बरहरवा की जनता यही पूछ रही है—
क्या ये ट्रैक्टर केवल बालू ढो रहे हैं, या फिर व्यवस्था की आंखों पर पट्टी बांधकर निकल रहे हैं?
क्या इस “बालू एक्सप्रेस” पर कभी ब्रेक लगेगा, या यह यूं ही बंगाल एक्सप्रेस बनकर दौड़ती रहेगी?
ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि अवैध बालू कारोबार पर रोक लग सके और क्षेत्र में कानून व्यवस्था बहाल हो।