नई दिल्ली।ढाका/मैमनसिंह। बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले के भालुका क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां कथित अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में उग्र भीड़ ने एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना ने न सिर्फ इलाके में दहशत फैला दी है, बल्कि एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपू चंद्र दास पर सोशल मीडिया या किसी बातचीत के दौरान कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। इसी आरोप को लेकर कुछ लोगों ने उसे घेर लिया और देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने दीपू को लाठियों और अन्य वस्तुओं से बेरहमी से पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
इतना ही नहीं, हत्या के बाद भी उग्र भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। आरोप है कि भीड़ ने मृतक के शव को सड़क पर घसीटा, फिर हाईवे को जाम कर दिया। इसके बाद शव को सड़क के डिवाइडर पर लटकाया गया और आग के हवाले कर दिया गया। इस पूरी घटना के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आई और काफी देर तक पुलिस मौके पर स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकी।
घटना की सूचना मिलते ही इलाके में तनाव का माहौल बन गया। आसपास के हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश दोनों देखा गया। कई परिवारों ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिए और लोग दहशत के साए में जीने को मजबूर हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना सुनियोजित प्रतीत होती है और इसमें कट्टरपंथी तत्वों की भूमिका की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस और प्रशासन की ओर से बाद में मौके पर पहुंचकर स्थिति को काबू में करने की कोशिश की गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना में शामिल दोषियों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हो पाई है।
मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि बांग्लादेश में इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जहां अफवाह या आरोप के आधार पर भीड़ हिंसा पर उतर आती है और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे “भीड़तंत्र की क्रूरता” करार देते हुए न्याय की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते ऐसी घटनाओं पर सख्ती नहीं की गई, तो समाज में भय और अविश्वास का माहौल और गहरा सकता है।
फिलहाल, भालुका इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। लेकिन दीपू चंद्र दास की बर्बर हत्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सुधार की जरूरत है।