लातेहार।
भारतीय सशस्त्र सेवाओं के गौरवशाली इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित विजय दिवस को सरस्वती विद्या मंदिर, धर्मपुर पथ, लातेहार में अत्यंत हर्ष, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सीआरपीएफ 11वीं बटालियन के इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार पाण्डेय तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में इंस्पेक्टर रामानंद सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि इंस्पेक्टर रामानंद सिंह, विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष राजीव रंजन पाण्डेय एवं प्रधानाचार्य उत्तम कुमार मुखर्जी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। अतिथियों का औपचारिक परिचय विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य लाल बहादुर राम द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि विषय प्रवेश प्रधानाचार्य द्वारा कराया गया।
मुख्य अतिथि जितेंद्र कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में विजय दिवस के ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य एवं बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश का निर्माण संभव हुआ। यह विजय केवल सैन्य शक्ति की नहीं, बल्कि मानवता, एकता एवं राष्ट्रधर्म की भी विजय थी।
उन्होंने विजय दिवस के तीन प्रमुख संदेशों पर बल दिया— राष्ट्र सर्वोपरि है, आपसी एकता अनिवार्य है तथा अनुशासन के साथ मातृभूमि की सेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीवन के किसी भी क्षेत्र में रहते हुए देश की सेवा की जा सकती है।
विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष राजीव रंजन पाण्डेय ने अपने संबोधन में भारतीय सेना के पराक्रम, त्याग एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान छोटे भैया-बहनों द्वारा प्रस्तुत सामूहिक गीत एवं नृत्य ने उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों को विशेष रूप से मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय की आचार्या मधु कुमारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्यगण, दीदी-जी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।