- आरसेटी में सखी मंडल की महिलाओं को मिला मशरूम उत्पादन का प्रमाण पत्र।
Dumka:- इंडियन बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान जामा, दुमका के तत्वाधान में महिलाओं के लिए 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण का समापन सोमवार को किया गया। प्रशिक्षण समापन के दौरान प्रशिक्षित प्रशिक्षुओं को मुख्य अतिथि जेएसएलपीएस के जिला प्रबंधक स्किल भोलानाथ गुप्ता एवं आरसेटी के निदेशक पंकज कुमार चौधरी के द्वारा संयुक्त रूप से प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र का वितरण किया एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्य अतिथि ने कहा कि झारखण्ड को सवारने में सखी मंडल से जुड़ी महिलाएं भी अहम् भूमिका निभा रही है।
भारत सरकार के आजीविका मिशन के तहत गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं को इस तरह का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है। इससे न केवल महिलाएं खुद का आर्थिक विकास कर रही है बल्कि राज्य के विकास में भी योगदान कर रही है।आरसेटी के निदेशक पंकज कुमार चौधरी ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर आप हुनरमंद बन चुकी है।अब आप अपने रोजगार स्थापित कर परिवार को आर्थिक सहयोग प्रदान करें। साथ ही उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती बहुत सस्ती और फायदेमंद है। इसकी खेती के लिए अलग से भूमि की आवश्यकता नहीं होती ।मूलतः इसकी खेती कृषि अवशिष्टों मे की जाती है।इस खेती में लागत कम लगती है और लाभ लागत का चौगुना होता है। बिहार से आये प्रशिक्षक अरविन्द आरोही ने कहा कि यह कुपोषण,प्रदूषण व कृषि अवशिष्टों की समस्या का बेहतर हल है, यह औषधि भी है। मशरूम में फोलिक एसिड पाया जाता है जो रक्ताल्पता के शिकार व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी है। इसके सेवन से कब्ज दूर होती है, पेट साफ होता है और खुलकर भूख लगती है।यह प्रोटीन और विटामिन बी-12 का एक अच्छा श्रोत है। यही कारण है कि मशरूम की खेती एक अच्छा एवं फायदेमंद व्यवसाय है।मशरूम के प्रशिक्षण के अलावे दीदियों को इंटरप्राइजेज डेवलोपमेंट की भी प्रशिक्षण दिया गया । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल प्रशिक्षुओं का अंतिम मूल्यांकन भारत सरकार द्वारा कराया गया। इस मौक़े पर आरसेटी के संकाय उत्पल कुमार लाहा,अमरदीप कुमार, कार्यालय सहायक अभिषेक कुमार एवं संजय सोरेन उपस्थित थे।