0 0 lang="en-US"> महिलाएं हो रही हैं सशक्त, मशरूम की खेती बनी आजीविका का जरिया
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महिलाएं हो रही हैं सशक्त, मशरूम की खेती बनी आजीविका का जरिया

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दुमका। इंडियन बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), जामा दुमका के तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में शामिल 32 सखी मंडल की महिलाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जेएसएलपीएस के जिला कार्यक्रम प्रबंधक निशांत एक्का और आरसेटी निदेशक आशीष अनुराग ने संयुक्त रूप से प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र सौंपा। इस अवसर पर श्री एक्का ने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

प्रशिक्षक सेनेहली हेम्ब्रोम ने बताया कि मशरूम न केवल पौष्टिक आहार है बल्कि यह कुपोषण और प्रदूषण की समस्या के समाधान में भी सहायक है। इसमें फोलिक एसिड, प्रोटीन और विटामिन-बी12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो खासकर महिलाओं के लिए लाभकारी है।

आरसेटी निदेशक आशीष अनुराग ने मशरूम उत्पादन को सस्ता और लाभकारी व्यवसाय बताते हुए कहा कि इसकी खेती कृषि अवशिष्टों पर आसानी से की जा सकती है और इसमें लागत के मुकाबले चार गुना तक लाभ होता है।

महिलाएं हो रही हैं सशक्त, मशरूम की खेती बनी आजीविका का जरिया

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को इंटरप्राइजेज डेवलपमेंट का भी ज्ञान दिया गया। कार्यक्रम में प्रणव प्रिदंशनी, कौशिक मंडल, उत्पल कुमार लाहा, अमरदीप कुमार और संजय सोरेन भी मौजूद रहे।

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