0 0 lang="en-US"> वक्फ के मुद्दे पर नीतीश कुमार, चन्द्रबाबू नायडू और चिराग पासवान के नाम गुजारिश नामा।
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वक्फ के मुद्दे पर नीतीश कुमार, चन्द्रबाबू नायडू और चिराग पासवान के नाम गुजारिश नामा।

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वक्फ के मुद्दे पर नीतीश कुमार, चन्द्रबाबू नायडू और चिराग पासवान के नाम गुजारिश नामा।

अमीन अंसारी,

रांची:-वक्फ अधिनियम 1995 में केन्द्र सरकार द्वारा लाये गए गैर जरूरी संशोधन, वक्फ संशोधन बिल 2024 को वापस लेने की मांग को लेकर आज 26 फरवरी 2025 को अंजुमन इस्लामिया सभागार में आमया संगठन के द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान के नाम “गुजारिश नाम” जारी किया गया।


गुजारिश नामा में केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये वक्फ संशोधन बिल को संविधान की मूल भावना के साथ समानता के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए आमया संगठन के केन्द्रीय अध्यक्ष एस अली ने बताया कि देश में जो वक्फ की सम्पति है अधिकतर मुस्लिम द्वारा दान किया गया, जिसमें मस्जिद, मदरसा, ईदगाह, मजार, मकबरा, दरगाह, खानकाह, कब्रिस्तान, मुसाफिरखाना, शैक्षणिक संस्थान आदि है जो वर्षों से स्थापित है। वही बहुत सी वक्फ सम्पत्ति राजा, नवाब, जमींदार, ओहदार द्वारा भी दिए गये है ।

संशोधित बिल में सर्वेक्षण आयुक्त के स्थान पर कलेक्टर को लाया गया है और उसे वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण का अधिकार दिया गया है।

वक्फ के तौर पर चिन्हित संपत्तियां जो सादे कागज पर या मौखिक है वो वक्फ नहीं रहेंगी, ऐसी संपत्तियों के स्वामित्व का निर्धारण कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।

बिल केंद्रीय वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड्स की संरचना में बदलाव करता है ताकि उनमें गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जा सके, जबकि हिंदू धार्मिक न्यास और सिख बंदोबस्ती को प्रशासित करने वाले संस्थानों में उनके संबंधित धर्मों के सदस्य होते हैं।

वक्फ ट्रिब्यूनल्स से मुस्लिम कानून के विशेषज्ञों को हटाने से वक्फ संबंधी संपत्तियों का निवारण प्रभावित हो सकता है।

बिल वक्फ के निर्माण को कम से कम पांच वर्ष तक इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्तियों तक सीमित करता है।

केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये वक्फ संशोधन बिल 2014 वक्फ एक्ट, वक्फ बोर्ड को कमजोर करता है जो कही से न्याय उचित नही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है इसलिए वक्फ संशोधन बिल को वापस लिया जाना चाहिए।


कार्यक्रम में आमया संगठन के पदाधिकारी जियाउद्दीन अंसारी, नौशाद आलम, मौलान फजलूल कदीर, इमरान अंसारी, शाहिद अफरोज, एकराम हुसैन, अब्दुल गफ्फार, जावेद अख्तर, अंजुमन खान, सईद अंसारी, इमरोज अंसारी, अफसर आलम, इमरान जिलानी, फिरोज अंसारी, जुबैर अंसारी आदि शामिल थे।

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