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झारखंड:अंधविश्वास के चलते मां-बेटी की कुल्हाड़ी से हत्या, आरोपी गिरफ्तार

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झारखंड:अंधविश्वास के चलते मां-बेटी की कुल्हाड़ी से हत्या, आरोपी गिरफ्तार

गुमला: झारखंड के गुमला जिले के रायडीह थाना क्षेत्र में अंधविश्वास के कारण दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। रायडीह थाना क्षेत्र के जमगई डुरु टोला गांव में एक व्यक्ति ने हैवानियत की हद पार करते हुए मां-बेटी की कुल्हाड़ी (टांगी) से बेरहमी से हत्या कर दी। इस नृशंस हत्याकांड के पीछे आरोपी का यह अंधविश्वास था कि उसकी पत्नी की बीमारी के लिए ये दोनों महिलाएं जिम्मेदार थीं और वे तंत्र-मंत्र कर रही थीं।

हत्या की इस वारदात के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डबल मर्डर के आरोपी कमलेश प्रधान को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।

अंधविश्वास ने ली दो निर्दोष महिलाओं की जान

गिरफ्तार आरोपी कमलेश प्रधान की पत्नी बीते कुछ समय से बीमार चल रही थी। उसे कई चिकित्सकों को दिखाया गया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। जब पत्नी की तबीयत में सुधार नहीं हुआ, तो कमलेश प्रधान ने इस बीमारी के लिए गांव की ही 68 वर्षीय वृद्धा सीता देवी और उसकी 50 वर्षीय बेटी शांति देवी को जिम्मेदार ठहराया।

कमलेश प्रधान को यह संदेह था कि ये दोनों महिलाएं तंत्र-मंत्र कर उसकी पत्नी को बीमार कर रही हैं। इस अंधविश्वास में पड़कर उसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और कुल्हाड़ी से काटकर दोनों की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने दोनों के शवों को गांव के पास स्थित पूरना पानी पहाड़ के जंगल में फेंक दिया, ताकि हत्या की बात छुपाई जा सके।

शव बरामद होने के बाद गांव में फैली सनसनी

जब सीता देवी और शांति देवी देर तक घर नहीं लौटीं तो उनके परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने गांव में खोजबीन शुरू की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की।

खोजबीन के दौरान गांव से थोड़ी दूरी पर स्थित पूरना पानी पहाड़ के पास एक डरावना नजारा देखने को मिला। वहां मां-बेटी के शव क्षत-विक्षत हालत में पड़े थे। यह देख ग्रामीणों में आक्रोश और डर का माहौल पैदा हो गया। ग्रामीणों ने तुरंत इस घटना की सूचना रायडीह थाना पुलिस को दी।

पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

घटना की जानकारी मिलते ही रायडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने जांच शुरू की और जल्द ही आरोपी कमलेश प्रधान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने स्वीकार किया कि उसे यह संदेह था कि उसकी पत्नी की बीमारी के लिए ये दोनों महिलाएं जिम्मेदार हैं और उन्होंने ही तंत्र-मंत्र किया है। इसी शक में उसने कुल्हाड़ी से वार कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया।



गांव में भय और आक्रोश का माहौल

इस निर्मम हत्या के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी गांवों में डायन-बिसाही के नाम पर हत्याएं हो रही हैं, जो समाज के लिए बेहद शर्मनाक है। लोगों ने सरकार और प्रशासन से इस तरह की कुप्रथाओं को रोकने के लिए सख्त कानून लागू करने की मांग की है।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि अंधविश्वास के चलते कई निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों को इस दिशा में जागरूकता फैलाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

डायन प्रथा: झारखंड में अंधविश्वास का घिनौना रूप

झारखंड और उसके आसपास के इलाकों में अब भी डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाएं मौजूद हैं। कई बार किसी बीमारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य समस्याओं के लिए निर्दोष महिलाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है और उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। इस मामले में भी यही हुआ, जब आरोपी ने बिना किसी ठोस कारण के दो निर्दोष महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में हर साल सैकड़ों महिलाएं डायन प्रथा का शिकार होती हैं। हालांकि सरकार ने इसके खिलाफ कड़े कानून बनाए हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और सामाजिक कुरीतियों के कारण इस तरह की घटनाएं आज भी हो रही हैं।

पुलिस ने की सख्त कार्रवाई की अपील

रायडीह थाना पुलिस ने कहा कि इस घटना में शामिल आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की घिनौनी हरकत न करे। पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि समाज में जागरूकता फैलाने की जरूरत है, जिससे लोग अंधविश्वास के चंगुल से बाहर निकल सकें।

सरकार और सामाजिक संगठनों को उठाने होंगे कदम

इस घटना के बाद सरकार और सामाजिक संगठनों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक करें। डायन-बिसाही और तंत्र-मंत्र जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त कानून का पालन सुनिश्चित किया जाए।

राज्य सरकार ने पहले भी इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कई प्रयास किए हैं, लेकिन यह मामला दिखाता है कि अभी भी जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।

निष्कर्ष: अंधविश्वास के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत

गुमला जिले में हुई यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि समाज में अंधविश्वास कितना गहरा बैठा हुआ है। मात्र संदेह के आधार पर दो निर्दोष महिलाओं की निर्मम हत्या यह साबित करती है कि डायन प्रथा जैसी कुरीतियां आज भी जिंदा हैं।

सरकार, प्रशासन और सामाजिक संगठनों को मिलकर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। कानूनों को सख्ती से लागू करना, ग्रामीणों को शिक्षित करना और अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाना जरूरी है, ताकि किसी और निर्दोष को अपनी जान न गंवानी पड़े।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच कर रही है। यह देखना होगा कि अदालत इस जघन्य अपराध के लिए आरोपी को किस तरह की सजा देती है।

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