0 0 lang="en-US"> वकुलावन सरकारी स्कूल में दूषित पानी से मिड-डे मील:बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
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वकुलावन सरकारी स्कूल में दूषित पानी से मिड-डे मील:बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

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वकुलावन सरकारी स्कूल में दूषित पानी से मिड-डे मील:बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

पंकज कुमार यादव की रिपोर्ट,

लातेहार:- जिले के गारु प्रखंड के कोटाम पंचायत स्थित वकुलावन सरकारी स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने के लिए दूषित पानी का उपयोग हो रहा है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। स्कूल परिसर में स्थित एकमात्र चापाकल कई सालों से खराब पड़ा है, जिसके कारण स्कूल प्रशासन को 500 मीटर दूर स्थित एक कूएं से पानी लाकर भोजन तैयार करना पड़ रहा है। यह पानी न केवल गंदा और दूषित है, बल्कि इसमें बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों के होने का खतरा भी है, जिससे बच्चों में विभिन्न बीमारियां फैलने का अंदेशा बढ़ गया है।

स्कूल के प्रधानाध्यापक सत्यपाल उरांव ने बताया कि इस समस्या के बारे में अधिकारियों को सूचित किया गया है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। चापाकल की मरम्मत के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा, “हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। पानी की गुणवत्ता इतनी खराब है कि हम बच्चे के लिए मिड-डे मील का सही तरीके से प्रबंध नहीं कर पा रहे हैं। यह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है।”

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्होंने प्रशासन से चापाकल मरम्मत की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। गांव के निवासी रामेश्वर सिंह ने कहा, “हमारे बच्चे शिक्षा लेने के लिए यहां आते हैं, लेकिन जिस पानी से खाना बनता है, वही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। हम चाहते हैं कि प्रशासन तुरंत इस मामले में ध्यान दे और बच्चों को साफ पानी की सुविधा प्रदान करे।”

स्कूल के बच्चों के स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे को लेकर गांववाले और स्कूल प्रशासन दोनों ही चिंतित हैं। दूषित पानी के सेवन से बच्चों में जलजनित बीमारियों जैसे दस्त, मलेरिया और टाइफाइड जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो उनके स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि प्रशासन इस स्थिति का तत्काल समाधान निकाले और बच्चों को स्वच्छ पानी की सुविधा उपलब्ध कराए।

पानी की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन से पहल की अपील की है। उनका कहना है कि यदि चापाकल की मरम्मत नहीं होती है, तो कूएं का पानी बच्चों के लिए खतरे की घंटी बन जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों का भविष्य इस समय केवल शिक्षा पर निर्भर नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी निर्भर है। इसलिए प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वे इस गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे।

स्कूल प्रशासन ने यह भी बताया कि कई बार वे स्थानीय अधिकारी से मिले हैं और समस्या की गंभीरता को बताया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला। ऐसे में अब बच्चों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए जल्दी से जल्दी चापाकल की मरम्मत की आवश्यकता है, ताकि स्कूल में बच्चों को स्वच्छ पानी मिल सके और वे सुरक्षित रूप से मिड-डे मील का सेवन कर सकें।

इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों से भी मदद की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि इस गंभीर समस्या का समाधान शीघ्र हो सके। ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन ने जल्द से जल्द इस समस्या का हल निकालने की मांग की है।

यदि प्रशासन इस मामले में लापरवाही बरतता है, तो यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरे का कारण बन सकता है, जिससे न केवल बच्चों की सेहत पर असर पड़ेगा, बल्कि पूरे गांव की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

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