- दिल्ली से भरी गई है बाल विवाह रोकने का हुंकार
गोला:- अक्षय तृतीया और शादी ब्याह के मौसम को देखते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एक भी बाल विवाह नहीं होने देने की हुंकार भरी गई है। इसकी रणनीति दिल्ली में तैयार की गई है।उक्त बातें अग्रगति के परियोजना पदाधिकारी किरण शंकर दत्त ने प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर कहा .उन्होंने आगे कहा कि शादी ब्याह के मौसम को देखते हुए बाल विवाह को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर गांव-देहात में काम कर रहे सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए यह काफी महत्वपूर्ण समय है। इस समय हजारों की संख्या में बच्चों को बाल विवाह के नर्क में झोंक दिया जाता है। अक्षय तृतीया का त्योहार बाल विवाह की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान देश भर के 161 गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है ।जो 2030 तक देश में बाल विवाह के खात्मे के लिए जरूरी ‘टिपिंग प्वाइंट’ यानी वह मुकाम जहां से बाल विवाह अपने आप खत्म होने लगेगा। इसको हासिल करने के लिए जमीनी अभियान चला रहे हैं।
प्रशिक्षण में सोशल वर्कर के बीच कार्यशाला
इस मुद्दे पर दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन के द्वारा किया गया था। कार्यशाला में आने वाले शादी ब्याह के मौसम में बाल विवाह की रोकथाम के लिए इन कार्यकर्ताओं को अदालत से निषेधाज्ञा आदेश लाने, प्रत्येक गांव का जनसांख्यिकीय अध्ययन और बाल विवाह की दृष्टि से संवेदनशील परिवारों की पहचान, धार्मिक स्थलों के सामने बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने वाले तथा इस मंदिर या मस्जिद में बाल विवाह नहीं कराए जाते हैं जैसे पोस्टर लगाने, पंचायत भवनों में बाल विवाह कराने या इसमें शामिल होने पर होने वाली सजा के बारे में जानकारी देने वाले पोस्टर लगाने सहित तमाम उपायों पर चर्चा की गई।
देश से 2030 तक बाल विवाह का होगा खत्मा
देश में बाल विवाह की ऊंची दर वाले इलाकों में पिछले एक वर्ष में गैरसरकारी संगठनों और सरकार के कार्य गति पकड़ी है। बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में अगले एक महीने काफी महत्वपूर्ण बताया गया है। समुदाय पंचायत, गैरसरकारी संगठन और राज्य, जिला एवं प्रखंड स्तर पर सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है कि इस अक्षय तृतीया किसी बच्चे का बाल विवाह नहीं होने पाए। उन्होंने आगे कहा कि बाल विवाह एक वैश्विक समस्या है ।लेकिन दुनिया के किसी भी देश ने एसडीजी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नीतियों और क्रियान्वयन के स्तर पर उतनी तरक्की नहीं की है। जितनी भारत ने की है। सच कहें तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की असली सफलता बाल विवाह के खात्मे में ही है।
भुवन ऋभु के किताब में बाल विवाह का जिक्र
भुवन ऋभु ने हाल ही में आई अपनी बेस्टसेलर किताब ‘व्हेन चिल्ड्रन हैव चिल्ड्रन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज’ में 2030 तक बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक मुकाम तक पहुंचने के लिए एक ठोस रणनीतिक खाका पेश किया है। इस किताब में बनाई गई रणनीतियों को देशभर के नागरिक समाज संगठनों ने भी अंगीकार किया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार देश में 20 से 24 आयुवर्ग की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया था।